हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , यमन की अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैय्यद अब्दुल मलिक अल-हौसी ने एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा,दुश्मन मानवीय मुद्दों और राहत एजेंसियों का भी घुसपैठ के लिए उपयोग करते हैं, जैसा कि यमन में इसकी स्पष्ट उदाहरण देखी गई।
उन्होंने आगे कहा,इन एजेंसियों से जुड़े नेटवर्क यमन में सीधे इज़राईली दुश्मन के अपराधों में शामिल रहे हैं और सरकारी लक्ष्यों को निशाना बनाने में सहयोग करते रहे हैं।
सैय्यद अब्दुल मलिक अल-हौसी ने कहा,ये कार्रवाइयाँ एक बाहरी सरकार की निगरानी में की गईं और इनका संबंध स्थानीय तत्वों के एक समूह से था। इस्राइली दुश्मन से जुड़े नेटवर्क केवल जानकारी इकट्ठा करने तक सीमित नहीं थे, बल्कि लक्ष्यों को निशाना बनाने की कार्रवाइयों में भी शामिल थे।
उन्होंने आगे कहा,इन तत्वों ने हथियारों के गोदामों, संवेदनशील इलाकों और महत्वपूर्ण स्थलों से संबंधित व्यापक जानकारी एकत्र की, जबकि गिरफ्तार तत्वों के इक़रारात पूरी तरह से पेश आने वाली घटनाओं से मेल खाते हैं।
अंसारुल्लाह यमन के प्रमुख ने कहा,दुश्मन अरब देशों और इस्लामी देशों के बाजारों से बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ प्राप्त करते हैं।उन्होंने कहा,अमेरिकी कंपनियाँ इराकी तेल को लूट रही हैं और इराकी जनता से पहले खुद इसके मुनाफे से फायदा उठा रही हैं।
सैय्यद अब्दुल मलिक अल-हौसी ने कहा,दो हज़ारवीं सदी के आरंभ में कुछ यूरोपीय देश और अमेरिका कुछ अरब देशों को धमकियाँ देते थे ताकि उनके उत्पादों के बहिष्कार को रोका जा सके।

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